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पेशाब नहीं कर पा रहा है बेबी, कà¥â€à¤¯à¤¾ हो सकते हैं इसके कारण और अंजाम?
नवजात शिशà¥à¤“ं के जनà¥à¤® के बाद उनका विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना पड़ता है, जैसे कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का सही समय और सही मातà¥à¤°à¤¾ में पेशाब का होना। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पेशाब ना होना किसी गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ का à¤à¥€ संकेत हो सकता है, इसलिठइसे नजरंदाज ना करें।
पेशाब नहीं कर पा रहा है बेबी, कà¥â€à¤¯à¤¾ हो सकते हैं इसके कारण और अंजाम?
नठबचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® लेना मां और परिवार के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठबहà¥à¤¤ सारे à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• परिवरà¥à¤¤à¤¨ लेकर आता है। खासकर पहली बार माता-पिता बनने पर हर छोटी बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ जानकारी की कमी होने की वजह से रख पाना संà¤à¤µ नही हो पाता।
à¤à¤¸à¥‡ में बहà¥à¤¤ बार बड़ी परेशानी को à¤à¥€ नजरअंदाज कर दिया जाता है। उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ सब में से à¤à¤• परेशान करने वाली बात होती है नवजात शिशॠका पेशाब ना करना। जनà¥à¤® के बाद 24 घंटे के अंदर बचà¥à¤šà¥‡ का पेशाब करना आवशà¥à¤¯à¤• होता है। साथ ही पेशाब के रंग और उसकी मातà¥à¤°à¤¾ पर à¤à¥€ गौर करना चाहिà¤à¥¤
​डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨
वरà¥à¤²à¥à¤¡ हेलà¥à¤¥ ऑरà¥à¤—नाइजेशन (WHO) की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ à¤à¤¸à¥€ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है जिसमें शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में दूध ना पीने की वजह से à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती है। इसलिठजरूरी है कि बचà¥à¤šà¥‡ को परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग कराà¤à¤‚ और बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग कराने वाली महिला à¤à¤°à¤ªà¥‚र पानी पिà¤à¥¤
​ना करें अनदेखा
नवजात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को समय पर पेशाब ना हो तो ये किसी गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ का कारण बन सकता है, इसलिठइसे बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ नजरंदाज ना करें। समय रहते चिकितà¥à¤¸à¤• से आवशà¥à¤¯à¤• सलाह जरूर लें।
​à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट रेनल फेलियर
किडनी खराब होने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को मेडिकल à¤à¤¾à¤·à¤¾ में à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट रेनल फेलियर कहा जाता है। किडनी खराब होने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ लगà¤à¤— 8 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पाई जाती है, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आईसीयू में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ करके उचित देखà¤à¤¾à¤² की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट रेनल फेलियर को उनके पेशाब करने के समय, मातà¥à¤°à¤¾ या बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ पेशाब ना करना (खासकर 24 घंटे के अंदर) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पता लगाया जाता है।
​पेशाब का रंग देखना होता है आवशà¥à¤¯à¤•
बचà¥à¤šà¥‡ को पेशाब होने के बाद डायपर चेक कर लेना बहà¥à¤¤ आवशà¥à¤¯à¤• होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर में किसी तरह की तकलीफ है या नहीं, ये à¤à¥€ पेशाब के रंग से पता लगाया जा सकता है।
जैसे बचà¥à¤šà¥‡ के पेशाब का रंग अगर पीला हो तो ये पीलिया होने का संकेत हो सकता है। हालांकि, जनà¥à¤® के बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पीलिया के थोड़े बहà¥à¤¤ लकà¥à¤·à¤£ होते हैं जो पेशाब के माधà¥à¤¯à¤® से निकल आते हैं। लेकिन कà¥à¤› à¤à¥€ असामानà¥à¤¯ लगे उसे नजरंदाज ना करें।
​जनà¥à¤® के à¤à¤• घंटे के अंदर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ है जरूरी
शिशॠके जनà¥à¤® के बाद 1 घंटे के अंदर मां का पहला गाढ़ा दूध उसे पिलाना बहà¥à¤¤ ही आवशà¥à¤¯à¤• होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे बचà¥à¤šà¥‡ को बहà¥à¤¤ सारे रोगों से लड़ने में मदद मिलती है और उसका शरीर सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ होकर रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ विकसित करता है। साथ ही मां को à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में पानी पीना चाहिà¤, ताकि बचà¥à¤šà¥‡ को दूध के माधà¥à¤¯à¤® से परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पानी मिले और सही समय पर पेशाब करे।
नवजात शिशॠजब मां के गरà¥à¤ से बाहर आते हैं, तब से लेकर à¤à¤• साल तक उनका विशेष देखà¤à¤¾à¤² करना आवशà¥à¤¯à¤• होता है, नवजात शिशॠमें कोई à¤à¥€ बात असामानà¥à¤¯ लगे तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह अवशà¥à¤¯ लें।
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